रिजवी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार ने पहली जनवरी 2009 से राज्य कर्मचारियों को छठवें वेतन आयोग की भांति वेतन देने का फैसला आज कर ही लिया। यह फैसला मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया जिसकी जानकारी उन्होंने स्वयं अपने आवास पर पत्रकारों को दी। फैसला वैसे तो पहली जनवरी 2006 से लागू किया गया है किन्तु 30 नवम्बर 2008 तक के बकाये का 80 प्रतिशत उनके भविष्य निधि खातों में जमा होगा और 20 प्रतिशत का नगद भुगतान तीन किस्तों में किया जायेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार इस फैसले से राज्य कर्मचारियों के साथ सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी लाभान्वित होंगे जो कुल कर्मचारियों का 80 प्रतिशत है। पेंशनभोगियों व पारिवारिक पेंशनधारकों को भी केन्द्र की भांति पुनरीक्षित पेंशन दी जायेगी। जिन पेंशन धारकों की आयु 80 साल या इससे अधिक है उनके बकाये का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष में ही किया जायेगा। पेंशन सहित नया वेतनमान लागू होने से सरकार पर सालाना 4,674 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा जबकि बकाये के भुगतान पर 13,662 करोड़ का भार अनुमानित है। इसकी प्रतिपूर्ति के लिए अनुत्पादक खर्चे कम किये जायेंगे तथा आयोजनेत्तर मद में पांच प्रतिशत की कटौती होगी। इसके अलावा सरकार अपने वित्तीय संसाधन भी बढ़ायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जहां पर छठवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वेतनमान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस रिपेार्ट के लागू होने से कर्मचारियों को कई तरह के फायदे होंगे। मसलन सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना की धनराशि जो अभी तक 30, 60 एवं 120 हजार रुपये थी वह बढ़कर एक लाख, दो लाख और चार लाख हो जायेगी। सबसे बड़ा लाभ एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगर के कार्मिकों का होगा। उन्हें भी प्रतिकर भत्ता दिया जायेगा। ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मृत्यु होने पर अनुग्रह राशि पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख तथा आतंकी घटना में मारे जाने पर पन्द्रह लाख कर दी गयी है। इसके साथ दस, बीस एवं तीस साल की सेवा पूरी करने पर कर्मचारियों को क्रमश: पहला दूसरा एवं तीसरा उच्चतर वेतनमान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्र ने वर्तमान वेतन श्रृंखला के स्थान पर संशोधित वेतन संरचना लागू करने का फैसला किया है। इस पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने भी 25 वेतनमान के स्थान पर 4 वेतन बैंड,18 ग्रेड वेतनमान और एक शीर्षस्थ वेतनमान देने का निश्चय किया है। महंगाई भत्ते की देयता और तिथि केन्द्र की भांति होगी अर्थात पहली जनवरी 2006 को महंगाई भत्ता शून्य होगा। इसके बाद पहली जुलाई 2006 से दो प्रतिशत, एक जनवरी 2007 से 6 प्रतिशत, एक जुलाई 2007 से 9, एक जनवरी 2008 से 12 और एक जुलाई 2008 से 16 प्रतिशत दी जायेगी। समय <p style=”text-align: right;”> </p>मान वेतनमान के स्थान पर 8 वर्ष, 16 वर्ष एवं 24 वर्ष पर पहले दूसरे एवं तीसरे स्तरोन्नयन की व्यवस्था की गयी है।
शिक्षको के लिए वर्तमान में लागू चयन वेतनमान, पदोन्नति वेतनमान की व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। सबसे अहम फैसला कर्मचारियों कों मिलने वाले मकान किराये भत्ते के बारे मे किया गया है। मकान किराया भत्ता ग्रेड वेतनवार पुनरीक्षित दर पर मिलेगा फल स्वरूप प्रत्येक कर्मचारी का मकान भत्ता वर्तमान धनराशि की तुलना में 2.2 प्रतिशत हो जायेगा। इससे सरकार पर 787 करोड़ का व्यय भार आयेगा। चिह्नित नगरों में अनुमन्य नगर प्रतिकर भत्ता औसतन तीन गुना किये जाने तथा शेष जिला मुख्यालयों व एक लाख से अधिक आबादी वाले नगरों में पहली बार प्रतिकर भत्ता देने का फैसला हुआ है। इस पर 65 करोड़ का व्यय भार आयेगा। स्वैच्छिक परिवार कल्याण कार्यक्रम को अपनाने वालों को एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि वैयक्तिक वेतन के रूप में दी जाएगी। दो बच्चों वालों को प्रसूति अवकाश 135 दिन के स्थान पर 180 दिन कर दिया गया है तथा बाल्य देखभाल अवकाश की अवधि दो साल कर दी गयी है। यह सुविधा गोद लिये बच्चों के सम्बन्ध में भी लागू होगी।
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